यह बात तब की है जब मैं कॉलेज में बी.एस.सी फ़ाइनल कर रहा था! मैं हमारी एक गणित की मैम के घर ट्यूशन पढ़ने जाता था। वो मैडम दिखने में बहुत ही ज्यादा सुन्दर थी तथा उनकी उम्र यही कोई 35-36 साल होगी। मेरी परीक्षा निकट आ रही थी, एक दिन मुझे गणित में कुछ परेशानी आई तो मैंने सोचा कि क्यों न मैडम के पास चला जाये !
सो मैं दोपहर के समय मैडम के घर चल दिया। वैसे तो अक्सर मैडम के घर कोई नहीं रहता ! मैडम के पति भी एक बहुत बड़ी कम्पनी में काम करते है तथा घर पर महीने दो महीने में एक बार आते हैं।
मैं मैडम के घर जाकर घंटी बजाने वाला ही था कि मैंने सोचा की पहले अन्दर देख तो लूँ कि अन्दर कौन-कौन है !
तो मैंने चाबी वाले छेद से देखा। मैंने देखा कि अन्दर दूसरे कॉलेज की तीन मैडम और बैठी हुई है! फ़िर मैंने देखा कि मेरी वाली मैडम ने टी.वी. ऑन करके एक सी.डी. चला दी। मैंने कुछ देर और ध्यान लगाये रखा तो मैंने देखा वो अश्लील वीडियो थी! मैं भी आँख लगाकर उन्हें देखने लगा। तभी मैंने देखा कि चारों मैडमों ने अपनी अपनी कमीज़ तथा ब्रा उतार दी तथा वे एक दूसरे के बोबों को दबाने लगी, मुँह में लेकर चूसने लगी।
इससे मेरा लिंग भी काफी कड़क हो गया लेकिन मैं यह सब नहीं चाहता था, इसलिए मैंने घंटी बजा दी। मेरा घंटी बजाना ही था कि सबने हड़बड़ाकर अपने-अपने कपड़े पहन लिए तथा टी.वी. बंद कर दिया। सभी एकदम सामान्य हो गई, जैसे कुछ नहीं हुआ है।
उसके बाद मेरी वाली मैडम ने आकर दरवाजा खोला, मैडम के दरवाजे खोलते ही मैंने उन्हें नमस्ते किया। मैडम मुझे देखकर कुछ आश्चर्य-चकित सी हो गई!
मैंने मैडम से कहा- मैडम, मुझे गणित में कुछ प्रोब्लम है इसलिए मैं समझने यहाँ आ गया।
मैडम बोली- चलो आओ अन्दर आ जाओ !
तभी मैडम ने मेरी पैंट की तरफ देखा, तो शायद वो समझ गई कि मैंने सब कुछ देख लिया है। मैं मैडम के घर के अंदर जाकर सोफ़े पर बैठ गया। मैडम दरवाजा बंद करके मेरे पास आई और बोली- तुम मेरे बैडरूम में बैठो क्योंकि यहाँ पर ये मैडम बैठी हुई हैं, मैं अभी 5 मिनट में अंदर आती हूँ।
मैं मैडम के बैडरूम में जाकर अपनी पढ़ाई करने लगा, मैडम उन तीनों से कुछ बात करने लग गई!
तभी मैडम मेरे कमरे में आ गई और मुझे पढ़ाने लगी।
फ़िर उनको पता नहीं क्या सूझा, उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपने वक्ष पर रख लिया। तो मैंने गुस्से से मेरा हाथ हटा लया तथा मैडम से कहा- मैडम, आप यह क्या कर रही हैं, आप मुझसे काफी बड़ी हैं !
मैडम मुझसे कहने लगी- अगर तुझे पढ़ना है तो मेरा यह काम भी करना पड़ेगा !
मैं कुछ सोच में पड़ गया तथा मैंने फैसला किया कि यह काम गलत है, इसलिए मैं किताबें उठा कर बाहर जाने लगा।
तो मैंने देखा कि बाहर मुख्य-द्वार का ताला अन्दर से लगा हुआ है और बाहर जाने के सभी दरबाजे बंद है। मैंने सोचा कि शायद मैडम ने अकेले की वजह से लगा दिए होंगे।
मैंने मैडम से कहा- मैं जा रहा हूँ, दरवाजा खोल दो !
तभी बाकी तीनों मैडम पता नहीं कहां से मेरे सामने आ गई और मुझसे बोली- अभी से कहाँ जा रहे हो?
तभी पीछे से मेरी मैडम ने मेरा मुँह पकड़ लया और बाकी तीनों मैडमों ने भी मुझे पकड़ लिया, मुझे पकड़कर बैडरूम में ले गई।
मैं जोर जोर से कहने लगा- मैडम, यह क्या हो रहा है?
लेकिन उन चारों ने मेरी एक नहीं सुनी और मुझे ले जाकर बिस्तर पर पटक दया। एक मैडम ने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए तथा एक मैडम ने मेरे दोनों पैर पकड़ लिए। अब मैं उठ भी नहीं सकता था।तभी बची दोनों मैडमों में से एक तो मुझे चूमने लगी तथा दूसरी मैडम मेरे कपड़े उतारने लगी तो मैं जोर जोर से चिल्लाने लगा। तो एक मैडम रसोई में गई तथा चाकू लेकर आई, तब तक दूसरी मैडम ने मेरी पेंट उतार दी थी।
तभी चाकू वाली मैडम आई और मेरे गाल पर तीन चार थप्पड़ लगा दिए। मैं जोर जोर से चिल्लाने लगा तो एक मैडम वोली- अब तू चिल्लाया तो मैं तेरा लंड चाकू से काट दूंगी ! उन्होंने मुझे चाकू दिखाते हुए कहा।
मैं बहुत ज्यादा डर गया और बिल्कुल चुप हो गया।
अब तक दूसरी मैडम ने मेरे पैंट और शर्ट उतार दए थे, अब मेरे शरीर पर केवल चड्डी-बनियान ही थे, और ये मैडमो से उतर नहीं रहे थे।
तो चाकू वाली मैडम ने चाकू से मेरे चड्डी-बनियान काटकर अलग कर दिए। अब मैं बिल्कुल नंगा चारों मैडमों के सामने था।
अब एक मैडम ने मेरी आँखों पर रुमाल बांध दिया, जिससे मुझे कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था। अब मैं न तो उठ सकता था और न ही कुछ देख सकता था। थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा लगा कि कोई मेरे हाथ पैर बांध रहा है।
अब मैडम ने मेरे आँखों की पट्टी खोल दी तो मैंने देखा कि मैडमों ने मेरे हाथ पैर रस्सी से बांधे हुए हैं।
मेरी वाली मैडम बोली- अरुण हम तुझे तेरी गलती की सजा दे रहे हैं।
मैंने कहा- मैडम मैंने क्या गलती की है?
दूसरी मैडम बोली- तूने हम चारों को छिपकर सेक्स करते हुए देखा, यह उसी की सजा है !
इतना कहते ही चाकू वाली मैडम ने चाकू मेरे लंड पर रखते हुए कहा- अगर अब तूने जरा सी भी बदमाशी की और हमारा कहना नहीं माना तो मैं तेरा लंड काट दूंगी ! इसलिए जैसा हम कहें वैसा ही करना !
अब मैं मरता, क्या ना करता ! उनकी बात मानने के लिए राजी हो गया। अब एक मैडम मेरे होंठो पर अपने होंठ रखकर जोर जोर से चूमने लगी। मुझे ऐसा लगा कि जैसे वो मैडम मेरा सारा थूक अपने अन्दर ले जाना चाहती हो !
दूसरी मैडम मेरे लंड को ऊपर नीचे करने लगी तथा कभी गोल गोल घुमाने लगी जैसे की रई से छाछ बनती है। इससे मेरे लंड में तनाव पैदा हो गया। बाकी दोनों मैडमों ने मेरे हाथ खोल दिए तथा दोनों मेरे दाएँ व बाएँ लेट गई और मेरा एक एक हाथ पकड़कर अपने अपने स्तनों पर लगा कर मुझसे बोली- इनको जोर जोर से दबाओ !
सो मैं दोनों मैडमो के बोबों को जोर जोर से दबाने लगा। इस समय मैं चारो मैडमों से घिरा हुआ था। एक मैडम मुझे किस पर किस किये जा रही थी, दूसरी मैडम मेरा लंड हिला रही थी, बाकी दोनों मैडम अपने अपने बोब दबवा रही थी।
इस समय मेरा लंड भी बहुत ज्यादा कड़क हो गया था। अब चारों मैडम मेरे से दूर एक साथ खड़ी हो गई। तभी एक मैडम ने दराज़ में से एक कंडोम निकाला, और मेरे लंड पर पहना दिया। अब तीन मैडम बैडरूम से बाहर चली गई। अब बैडरूम में मैं और केवल मेरी वाली मैडम ही रह गई थी। मेरी टांगें अभी भी बंधी हुई थी। पता नहीं जाने मुझे क्यों एसा लगा कि मुझे मेरे बलात्कार में मजा आया, मजा ही नहीं बहुत मजा आया।
Saturday, March 4, 2017
Hindi font sex story
Sunday, February 19, 2017
Pooja ki chudai
आज मई आप लोगो के साथ अपनी रियल स्टोरी शेयर करने जा रहा हु..
ये बात २००६ की है तब मई ग्रादुअशन लास्ट इयर(अलाहाबाद यूनिवर्सिटी) में था. मई किसी भी लड़की में सिर्फ़ दो ही चीजे देखता हु एक उसके बूब्स और दूसरी उसकी गंद, जिस लड़की की बूब्स और गंद भरी भरी होती है वो लड़की मुझे बोहोत सेक्सी लगती है और ऐसी लड़की को देख कर मेरा लैंड खड़ा हो जाता है और उसे छोड़ने को मचलने लगता है. मैंने अपने फ्रिएंड्स से उनकी गर्लफ्रेंड की चुदाई के किस्से सुने थे और मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नही थी इस लिए मेरा मन चुदाई को भोत तरसता था. पैर मेरी भी इच्छा पूरी हो गई. एक शाम जब मई अपने चाट पैर बैठा सड़क पैर आती जाती खूबसूरत लड़कियों के हुस्न के मज़े ले रहा था तब अचानक मैंने अपने पड़ोस वाली चाट पैर एक लड़की को देखा. मई तो उसे देखते ही रह गया वो लड़की क्या खिलता हुआ कमल था बस इतना समझ लो १४-१५ साल की लड़की थी वो जिसने जवानी की दहलीज पे अभी अभी अपने कदम रखे थे, उसके बूब्स तो बोहोत बारे नही थे पैर उसकी गंद बोहोत भरी भरी थी, देखते ही मेरा मन किया काश मई इसकी गंद को अपने हाथों से सहला सहला के इसे छोड़ पड़ा.
अच्तुअल्ली काया है के मेरे परोस वाला घर काफी दिनों से खली था और वो अपने मम्मी और पापा के साथ वह किराये पे रहने उसी दिन आई थी. उस रात मई उसे अपने सपने में ही छोड़ के खुश हो गया पैर मैंने फैसला कर लिया था की इसे मई छोड़ के ही रहूँगा. न जाने क्यों वो मुझे बोहोत अची लगी थी. शायद ये पहली नज़र का प्यार था.अगले दिन मई फिर शाम को चाट पे पोहंच गया और उसका वेट करने लगा पैर शायद मेरी कि़स्मत ख़राब थी काफी देर बाद भी वो नही आई. थोरी देर बात मेरी मोम भी चाट पैर आ गई और मई अपनी मोम से बात करने लगा. अचानक से उसकी मोम भी चाट पैर आ गई पैर मेरी नज़रें तो उसे ढूँढ रही थी, जब उसकी मोम ने मेरी मोम को देखा तो दोनों में बातचीत शुरू हो गई. मैंने भी सोचा चलो अच है शायद मेरा भी कुछ काम बन जाए इस लिए मई उनकी बातें सुन ने लगा उसकी मोम ने बताया की उनकी लड़की १०थ क्लास में पढ़ती है और उसे मैथ के लिए कोई अच टूशन चाहिए. बस फिर क्या था मेरी तो मन मांगी मुराद पूरी हो गई मैंने झट से कहा आंटी मैथ तो मई भी पड़ता हु आप चाहें तो मई ही पढ़ा देता हु. उसकी मोम ने मेरी कुँलिफिकाशन, और दूसरे तुशंस के बारे में पुछा और उसको मुझसे टूशन दिलवाने के लिए राज़ी हो गई.
अगले दिन वो अपनी मोम के साथ मेरे घर आई ओह गोद! वो भरी भरी गंद वो बूब्स उसपर उसका परियों जैसा चेहरा मेरा लैंड तो पैंट में तूफ़ान मचने लगा. मई सोफे पे बैठ गया वो मेरे साथ वाले सोफे पे बैठी थी और उसकी मोम दूसरे कमरे कमरे में मेरी मोम से बात करने चली गई. हाय कमरे में सिर्फ़ मई था और वो मन तो कर रहा था खूब जूर जूर से उसके बूब्स दबा कर उसे किस करू पैर किस तरह से अपने जज्बात पैर काबू किया ये सिर्फ़ मई ही जनता हु. मैंने पुछा तुम्हारा नामे क्या है. उसने कहा "पूजा मिश्रा". ओह गोद कितनी प्यारी आवाज़ थी और उसके होंट जी तो चाह आज अभी इन प्यालों को अपने लबों से लगा कर जी भर के पियून. दिल पैर पत्थर रखना किसे कहते है ये उस दिन मैंने जाना था.
दोसरे दिन मैंने उसके लिए टेबल के दूसरी तरफ़ एक कुर्सी रख दी ताकि वो मेरे सामने रहे. जब वो आई तो मैंने उसे कुर्सी पे बैठने को कहा अच्तुअल्ली मई चाहता था की वो मेरे सामने बैठे ताकि मई उसके बूब्स को उसकी टी-शर्ट के गले में से दीख सकू. पैर वो कुर्सी पैर सीधी हो कर बैठ गई और जब मई कोई क़ुएस्तिओन सोल्वे करने को देता तो वो कॉपी अपनी गोद में रख कर लिखने लगती, जब बार बार उसने ऐसा ही किया तो मैंने उस से कहा की कॉपी को टेबल पैर रख कर लिखा करो वरना तुम्हारी व्रितिंग ख़राब हो जायेगी तो वो कॉपी टेबल पैर रख कर लिखने लगी.. वो क्या गोल गोल खूबसूरत बूब्स थे उसके मुझे बोहोत मज़ा आया. उसने भी कई बार नोटिक किया की मई क्या देख रहा हु पैर वो कुछ न बोली.
धीरे धीरे वो मुझसे बोहोत फ्रीएंद्ली हो गई और खुल कर बात करने लगी. एक दिन जब मेरा पीसी ख़राब था तो मई उसके घर चला गया. मैंने आंटी से कहा की मेरा पीसी ख़राब है मई पूजा का पीसी उसे कर लू तो आंटी ने मुझे पेर्मिस्सिओं दे दी. वो कॉलेज गई थी मई कद से सोंग्स अपने मोबाइल में ट्रान्सफर करने के बाद उसके पीसी को एक्स्प्लोरे करने लगा. मई तो देख कर दंग रह गया उसके पीसी में ढेर साड़ी ब्लू फिल्म्स थी मैंने पीसी बंद किया और आंटी से कहा की अब मई घर जा रहा हूँ. साड़ी रात मई सोचता रहा की अगर पूजा ये सब देखती है तो १००% उसका मन भी चुदवाने को करता होगा और उसका कोई बोय्फ़्रिएन्द भी नही है. मैंने फ़ैसला किया की मई पूजा से इस बारे में बात करूँगा. और उस रात मैंने अपने सपने में उसकी जमकर चुदाई की......
अगले दिन जब पूजा टूशन के लिए आई तो मैंने उस से बातों बातों में कहा की कल मई तुम्हारे पीसी पे काम कर रहा था मैंने उसमे कई साड़ी ब्लू फिल्म्स देखि क्या तुम ब्लू फ़िल्म देखती हो? वो एकदम से सकपक गई उस से कोई जवाब देते न बना फिर वो इंकार करने लगी की उसके पीसी में ऐसा कुछ नही है तो मैंने कहा अच घर चलो मई अभी दिखता हु. तो वो कहने लगी की आपने ही कल मेरे पीसी में ये मूवी दाल दी होगी. मैंने सोचा हो सकता है ब्लू फ़िल्म किसी और ने राखी होगी. सच कहू तो मेरा शक उसके पापा पैर गया पैर फिर मुझे याद आया की एक दिन अंकल ने अपने मोबाइल की फोटो मुझे कद में राइट करने को दी थी. मतलब साफ़ था वो पीसी नही चला सकते थे और वो फिल्म्स पूजा ने ही राखी होगी...
मैंने बाद में कई बार पूजा से इस बारे में बात की पैर पूजा साफ़ इंकार कर देती थी. एक रात जब मैं इन्ही ख्यालों में था तो मैंने सोचा की अगर पूजा ब्लू फिल्म्स देखती है तो वो भी चुदाई को तरसती होगी फिर वो मुझसे शर्मा क्यों रही है. साड़ी रात मई ये ही सोचता रहा फिर मैंने सूचा की मई पूजा के साथ जबरजस्ती सेक्स करूँगा. और उस दिन से मई मौका देखने लगा. फिर एक दिन मुझे मौका मिल ही गया. मेरी मोम मर्केत्तिंग करने गई थी और जल्दी घर आने वाली नही थी. उस दिन जब पूजा आई तो मैंने उसे अन्दर वाले कमरे में बैठने को कहा. वो स्कर्ट और टॉप पहने थी और बोहोत सेक्सी लग रही थी.मई ललचाई नज़रों से पूजा को देख रहा था जब उसने देखा तो वो बोली "सर क्या देख रहे हो, आज पड़ना नही है क्या?". मेरी नजरे उसके बूब्स पैर थी उसके निप्प्लेस टॉप के उपर से दिख रहे थे मतलब साफ़ था उसने ब्रा नही पहनी थी. उसने शायद मेरी नजरों में वासना देख लिया था इस लिए वो उठ कर जाने लगी. तभी मुझे न जाने क्या हुआ मैंने अचानक से उसे पकड़ कर दिवार से लगा दिया और उसके होंतो को किस करने लगा उसने चुराने की बोहोत कोशिश की पर मैंने उसके खूब किस किया फिर जब मैंने उसे चोदा तो तो उसकी आँखों में आंसू थे.मई थोरा डर गया कहीं ये किसी से कह न दे फिर मैंने सोचा जब इतना कर दिया है तो काम पूरा ही कर लू जो होगा देखा जाएगा. फिर वो जैसे ही दरवाजे की तरफ़ बड़ी मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया और उसकी बूब्स को जोर जोर से दबाने लगा. वो चिल्लाने लगी "चोदिये सर ये क्या कर रहे हैं मई पापा से कह दूंगी." मैंने कहा "पूजा मेरी जान आज तो चाहे जो हो जाए मई तुझे नही चोरुंगा."
मैंने उसका टॉप उतर दिया और उसके बूब्स को खूब दबाया फिर मैं एक हाथ से उसके बूब्स दबाने लगा और दूसरा हाथ उसके स्कर्ट में दाल दिया. वो कितनी चिकनी थी उसकी छूट और उसने पैंटी तक नही पहनी थी. मैं अपनी एक ऊँगली से उसकी छूट को सहलाने लगा. वो जूर जूर से लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी और मेरी गिरफ्त से छूटने के लिए मचलने लगी. पैर मई उसको पूरी ताकत से अपने जिस्म से चिपका कर उसके बूब्स को दबा रहा था और सुकी छूट को सहला रहा था. फिर मैंने उसे बेद पैर गिरा दिया उअर उसकी स्कर्ट भी उतर दी वो उसकी छूट एकदम साफ़ और चिकनी थी. अब मई अपने दोनों हाथों से उसके बूब्स दबा कर चूसने लगा तो वो मुझे अपने से दूर धक्का देने लगी और कहने लगी "सर प्ल्ज़ मुझे चोर दीजिये वरना मई अपने पापा से कह दूंगी." मैंने कहा "चुप साली रंडी ब्लू फिल्मे देखती तो तेरे पापा कुछ नही कहते अब तो मई तुझे बिना चोदे नही चोरुंगा."
फिर मई उसे कमर से पकड़ उसकी छूट को चाटने लगा. मुझे उसकी छूट चाटने में खूब मजा आ रहा था और मई मजे ले ले कर उसकी छूट को चाट रहा था और बीच में उसकी छूट को अपने दांतों से दबा भी रहा था. थोरी देर बाद उसका जिस्म जूर से झटका खाने लगा और उसकी छूट ने खूब सारा पानी मेरे उपर चोर दिया. तो मैंने बुला "साली कुतिया मज़े ले ले कर अपनी छूट चुसवा रही और अपने बाप से बोलने की धमकी देती है. क्या अपने बाप से ये भी कहेगी की मैंने तेरी छूट छाती थी." वो कुछ न बोली बस आँखे बंद कर के लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी. फिर मैंने उसकी छूट को चाट कर साफ़ किया और फिर से उसके बूब्स को चूसने लगा. फिर मैंने अपने सारे कपरे उतर दिए और अपने लैंड उसकी छूट पे जैसे ही रखा वो अपनी गंद इधर उधर हिलाने लगी और कहने लगी "प्ल्ज़ डालना नही मुझे बोहोत दरद होगा". पैर मैंने सोच लिया था मई इसे खूब जूर जूर से चोदुंगा. मैंने एक हाथ से उसके दोनों हाथो को उसके सर के उपर कर के पकड़ लिया और दूसरा हाथ उसके मुह पैर रख कर एक खूब जूर का धक्का मारा मेरा लैंड उसकी छूट की ऐसी तैसी करता हुआ पूरा का पूरा एक ही झटके में उसकी छूट में घुस गया. वो बेचारी जूर जूर से चतपताने लगी और पूरे कमरे में उसकी घुटी घुटी सी चीख गूंजने लगी. पैर मैंने उसपर जरा भी तरस नही खाया और जूर जूर से धक्के मरने लगा. उसकी छूट से काफी खून निकल रहा था. फिर थोरी देर बाद मेरे लैंड ने ढेर सारा पानी उसकी छूट में चोर दिया.
मैं तो उसे कम से दो बार और चोदना चाहता था पैर उसकी हालत देख कर मैंने उसे चोर दिया. मैंने कपड़े से उसके जिस्म पैर लगे खून को साफ़ किया और खुद बाथरूम में चला गया जब मई वापस आया तो वो जा चुकी थी.आगे क्या हुआ ये मई बाद में बताऊंगा.
Monday, February 6, 2017
गाण्ड मारे सैंया
हमारा घर दो मंज़िला है , नीचे के भाग में सास-ससुर रहते हैं और हमारा शयनकक्ष ऊपर के माले पर है। हमारे शयनकक्ष की पिछली खिड़की बाहर गली की ओर खुलती है जिसके साथ एक पार्क है। पार्क के साथ ही एक खाली प्लॉट है जहाँ अभी मकान नहीं बना है। लोग वहाँ कूड़ा करकट भी डाल देते हैं और कई बार तो लोग सू सू भी करते रहते हैं।
उस दिन मैं सुबह जब उठी तो तो मेरी नज़र खिड़की के बाहर पार्क के साथ लगती दीवार की ओर चली गई। मैंने देखा एक 18-19
साल का लड़का दीवाल के पास खड़ा सू सू कर रहा है , वो अपने लण्ड को हाथ में पकड़े उसे गोल गोल घुमाते हुए सू सू कर रहा है। मैंने पहले तो ध्यान नहीं दिया पर बाद में मैंने देखा कि उस जगह पर दिल का निशान बना है और उसके अंदर पिंकी नाम लिखा है।
मेरी हँसी निकल गई। शायद वा उस लड़के की कोई प्रेमिका होगी। मुझे उसकी इस हरकत
पर बड़ा गुस्सा और मैं उसे डाँटने को हुई पर बाद में मेरी नज़र उसके लण्ड पर पड़ी तो मैं तो उसे देखती ही रह गई। हालाँकि उसका लण्ड अभी पूर्ण उत्तेजित तो नहीं था पर
मेरा अन्दाज़ा था कि अगर यह पूरा खड़ा हो तो कम से कम 8-9 इंच का तो ज़रूर होगा और मोटाई भी कम नहीं होगी।
अब तो रोज़ सुबह-सुबह उसका यह क्रम ही बन गया था। सच कहूँ तो मैं भी सुबह सुबह इतने लंबे और मोटे लण्ड के दर्शन करके धन्य हो जाया
करती थी। कई बार रब्ब भी कुछ लोगों पर खास मेहरबान होता है और उन्हें इतना लंबा और मोटा हथियार दे देता है !
काश मेरी किस्मत में भी ऐसा ही लण्ड होता तो मैं रोज़ उसे अपने तीनों छेदों में लेकर धन्य हो जाती। पर पिछले 2-3 दिनों से पता नहीं वो लड़का दिखाई नहीं दे रहा था। वैसे तो वो हमारे पड़ोस में ही रहता था पर ज़्यादा जान-पहचान नहीं थी। मैं तो उसके लण्ड के दर्शनों के लिए मरी ही जा रही थी।
उस दिन दोपहर के कोई दो बजे होंगे , सास-ससुर जी तो मुरारी बापू के प्रवचन सुनने चले गये थे और गणेश के दुकान जाने के बाद काम करने वाली बाई भी सफाई आदि करके चली गई थी और मैं घर पर अकेली थी। कई दिनों से मैंने अपनी झाँटें साफ नहीं की थी , पिछली रात को गणेश मेरी चूत चूस रहा था तो उसने उलाहना दिया था कि मैं अपनी झाँटें सॉफ रखा करूँ ! नहाने से पहले मैंने अपनी झाँटें सॉफ करके अपनी लाडो को चकाचक बनाया,
उसके मोटे होंठों को देख कर मुझे उस पर तरस आ गया और मैंने तसल्ली से उसमें अंगुली करके उसे ठंडा किया और फिर बाथटब में खूब नहाई।
गर्मी ज़्यादा थी, मैंने अपने गीले बालों को तौलिए से लपेट कर एक पतली सी नाइटी पहन ली। मेरा मूड पेंटी और ब्रा पहनने का नहीं हो रहा था। बार-बार उस छोकरे का मोटा लण्ड ही मेरे दिमाग़ में घूम रहा था। ड्रेसिंग टेबल के सामने शीशे में मैंने झीनी नाइटी के अंदर से ही अपने नितंबों और उरोज़ों को निहारा तो मैं तो उन्हें देख कर खुद ही शरमा गई।
मैं अभी अपनी चूत की गोरी गोरी फांकों पर क्रीम लगा ही रही थी कि अचानक दरवाज़े की घण्टी बजी। मुझे हैरानी हुई कि इस समय कौन आ सकता है ?
मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा कि सामने वही लड़का खड़ा था। उसने हाथ में एक झोला सा पकड़ रखा था। मेरा दिल ज़ोर
ज़ोर से धड़कने लगा था। मैं तो मुँह बाए उसे देखती ही रह गई थी , वो भी मुझे हैरानी से देखने लगा।
"वो.... मुझे गणेश भाई ने भेजा है !"
" क.. क्यों .. ?"
" वो बता रहे थे कि शयनकक्ष का ए सी खराब है उसे ठीक करना है !"
"ओह.. हाँ आओ.. अंदर आ जाओ !"
मैं तो कुछ और ही समझ बैठी थी, हमारे शयनकक्ष का ए सी कुछ दिनों से खराब था,
इस साल गर्मी बहुत ज़्यादा पड़ रही थी,
गणेश तो मुझे ठंडा कर नहीं पाता था पर ए सी खराब होने के कारण मेरा तो और भी बुरा हाल था।
मैं उसे अपने शयनकक्ष में ले आई और उसे ए सी दिखा दिया। वो तो अपने काम में लग गया पर मेरे मन में तो बार बार उसके काले और मोटे तगड़े लण्ड का ही ख़याल आ रहा था।
"तुम्हारा नाम क्या है ?" मैंने पूछा।
"जस्सी... जसमीत नाम है जी मेरा !"
"नाम से तो तुम पंजाबी लगते हो?"
" हाँ जी..."
" तुम तो वही हो ना जो रोज़ सुबह सुबह उस दीवाल पर सू सू करते हो?"
" वो.. वो.. दर असल....!!" इस अप्रत्याशित सवाल से वो सकपका सा गया।
"तुम्हें शर्म नहीं आती ऐसे पेशाब करते हुए ?"
" सॉरी मेडम... मैं आगे से ध्यान रखूँगा!"
"कोई जवान औरत ऐसे देख ले तो ?"
" वो जी बात यह है कि हमारे घर में एक ही
बाथरूम है तो सभी को सुबह सुबह जल्दी रहती है !" उसने अपनी मुंडी नीची किए हुए ही जवाब दिया।
"हम्म... तुम यह काम कब से कर रहे हो?"
" बस 3-4 दिन से ही.....!"
उसकी बात सुनकर मेरी हँसी निकल गई , मैंने कहा , "पागल मैं सू सू की नहीं , ए सी ठीक करने की बात कर रही हूँ।"
"ओह... दो साल से यही काम कर रहा हूँ।"
" हम्म... ? तुम्हें सू सू करते किसी और ने तो नहीं देखा ?"
" प... पता नहीं !"
"यह पिंकी कौन है ?"
" वो.. वो.. कौन पिंकी ?"
" वही जिसके नाम के ऊपर तुम अपना वो पकड़ कर गोल गोल घुमाते हुए सू सू करते रहते हो?"
वो बिना बोले सिर नीचा किए खड़ा रहा।
"कहीं तुम्हारी प्रेमिका-व्रेमिका तो नहीं ?"
" न... नहीं तो !"
"शरमाओ नहीं .... चलो सच बताओ ?" मैंने
हँसते हुए कहा।
" वो ... वो.. दर असल मेरे साथ पढ़ती थी !"
" फिर?"
" मैंने पढ़ाई छोड़ दी !"
"हम्म !!"
"अब वो मेरे साथ बात नहीं करती !"
" तुम्हारी इस हरकत का उसे पता चल गया तो और भी नाराज़ होगी !"
" उसे कैसे पता चलेगा?"
" क्या तुम्हें उसके नाम लिखी जगह पर सू सू करने में मज़ा आता है ?"
" हाँ... ओह.. नही.... तो मैं तो बस... ऐसे ही?"
" हम्म... पर मैंने देखा था कि तुम तो अपने उसको पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से हिलाते भी हो?"
" वो.. वो... ?" वो बेचारा तो कुछ बोल ही नहीं पा रहा था।
"अच्छा तुमने उस पिंकी के साथ कुछ किया भी था या नहीं ?"
" नहीं कुछ नहीं किया !"
"क्यों ?"
" वो मानती ही नहीं थी !"
"हम्म... चुम्मा भी नहीं लिया ?"
" वो कहती है कि वो एक शरीफ लड़की है और शादी से पहले यह सब ठीक नहीं मानती !"
"अच्छा... चलो अगर वो मान जाती तो क्या करते ?"
" तो पकड़ कर ठोक देता!"
"हाय रब्बा .... बड़े बेशर्म हो तुम तो ?"
" प्यार में शर्म का क्या काम है जी ?" अब उसका भी हौसला बढ़ गया था।
"क्या कोई और नहीं मिली ?"
वो हैरानी से मेरी ओर देखने लगा, अब तक उसे मेरी मनसा और नीयत थोड़ा अंदाज़ा तो हो ही गया था।
"क्या करूँ कोई मिलती ही नहीं !"
"तुम्हारी कोई भाभी या आस पड़ोस में कोई नहीं है क्या ?"
" एक भरजाई (भाभी) तो है पर है पर वो भी बड़े भाव खाती है !"
" वो क्या कहती है ?"
" वो भी चूमा-चाटी से आगे नहीं बढ़ने देती !"
" क्यों?"
" कहती है तुम्हारा हथियार बहुत बड़ा और मोटा है मेरी फट जाएगी!"
"हम्म...साली नखरे करती है ?"
" हां और वो साली सुनीता भी ऐसे ही नखरे करती रहती है!"
"कौन ? वो काम वाली बाई ?"
" हाँ हाँ ! ... वही !"
"उसे क्या हुआ ?"
" वो भी चूत तो मरवा लेती है पर ... ! गाण्ड नहीं मारने देती... !"
"हाय रब्बा... कीहोजी गल्लां कर्दा ए ?"
" सच कहता हूँ साली अपनी गाण्ड को ऐसे मटका कर चलती है जैसे सारी सड़क उसके पियो (बाप) दी ऐ!"
मेरी चूत तो उसकी बातों से पानी पानी हो चली थी, मैंने अपनी नाइटी के ऊपर से ही अपनी चूत की फांकों को मसलना चालू कर दिया। वो कनखियों से मेरी ओर देख रहा
था।
"हम्म... ?"
" उसकी मटकती गाण्ड बहुत ही जानमारू है.... !"
"हम्म... ?"
" वैसे एक बात बताओ ?"
" हम्म.... ?"
" मैं सच कहता हूँ आप भी बहुत खूबसूरत हैं !"
"कैसे ?"
" आपकी फिगर तो कमाल की है !"
" हम्म....और क्या-क्या कमाल का है ?"
मैं उसका हौसला बढ़ाना चाहती थी , मेरी
चूत में तो गंगा-जमना बहने लगी थी, मैं सोच रही थी कि अब फज़ूल बातों को छोड़ कर
सीधे मुद्दे की बात करनी चाहिए।
"वो .. वो आपके चूतड़... मेरा मतलब कमर बहुत पतली है!"
"कमर पतली होने से क्या होता है ?"
" वो.. जी आपके चूतड़ बहुत गोल-मटोल और कातिलाना हैं !"
"अच्छा ? और ?"
" आपके चूचे भी बहुत खूबसूरत हैं !"
"तुम्हें पसंद हैं ?"
" हाँ जी... मैं तो आपको रोज़ देखता रहता हूँ
?"
" ओह.. कैसे.. ?"
" छत पर जब आप कपड़े सुखाने आती हैं तो मैं रोज़ देखता हूँ !"
" तुम बड़े बदमाश हो... ?"
" जी... आप इतनी खूबसूरत हैं... तो बार बार देखने का मन करता है!"
"हम्म.... तो पहले क्यों नहीं बताया ?"
" मैं डर रहा था !"
"क्यों ?"
" कहीं आप बुरा ना मान जाएँ?"
" अगर बुरा ना मानू तो ?"
" तो..... तो... ?"
उसका गला सूखने लगा था , उसकी कनपटियों से पसीना आने लगा था , मैंने देखा उसकी पैंट में उभार सा बनने लगा था। मैंने भी अपनी नाइटी के ऊपर से ही अपनी लाडो को फिर से मसलना चालू कर दिया, मेरी चूत में बिच्छू काटने लगे थे, बार-बार उसके लण्ड के ख़याल से ही मेरी लाडो पानी पानी हो गई थी , मेरा मन कर रहा था कि झट से इसकी पैंट की ज़िप खोल कर उसके लण्ड को निकाल कर अपनी चूत में डाल लूँ !
"क्या तुम इन खूबसूरत चूचों को देखना चाहोगे ?"
" ओह.. हाँ नेकी और पूछ पूछ ?"
" पर बस देखने ही दूँगी... और कुछ नहीं करने दूँगी। "
अब वो इतना भी फुद्दू भी नहीं था कि मेरा खुला इशारा ना समझता !
"कोई गल नई मेरी सोह्नयो !" कहते हुए उसने झट से मुझे अपनी बाहों में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से मेरे होंठों को चूमने लगा।
मैंने अपना एक हाथ नीचे करके पैंट के ऊपर से ही उसके खड़े लण्ड को पकड़ लिया और उसे मसलने लगी। उसने अपने एक हाथ से मेरे स्तन
दबाने चालू कर दिए और दूसरा हाथ मेरे नितंबों की खाई में फिराने लगा।
मेरी लाडो से रस निकल कर मेरी जांघों को भिगोने लगा था, मुझे लगा कि चूमा-चाटी के इन फज़ूल कामों को छोड़ कर सीधा ही ठोका-ठुकाई कर लेनी चाहिए। मैंने उसे पास पड़े सोफे पर धकेल दिया और उसकी पैंट की जीप खोल दी, फिर कच्छे के अंदर हाथ डाल
कर उसका लण्ड बाहर निकाल लिया।
मेरे अंदाज़े के मुताबिक उसका काले रंग का लण्ड 8 इंच लंबा और 2 इंच मोटा था. मैंने उसके टोपे की चमड़ी को नीचे किया तो उसका गुलाबी सुपारा ऐसे चमकने लगा जैसे कोई मशरूम हो ! मैंने झट से उसका सुपारा अपने मुँह में भर लिया , मैं उकड़ू बैठ गई और ज़ोर ज़ोर से उसके लण्ड को चूसने लगी।वो तो आ.. ओह... ब... भरजाई जी ... एक मिनट... ओह... करता ही रह गया !